आठवणी तुझ्या मनात, अश्रू माझ्याच डोळ्यात !!.. दोघेही मनसोक्त वाहतो, आठवणीच्या महापुरात !!! ...
होठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दोबन जाओ मीत मेरे मेरी प्रीत अमर कर दोना उम्र की सीमा हो, ना जन्म का हो बंधनजब प्यार करे कोई तो देखे केवल मननई रीत चलाकर तुम ये रीत अमर कर दोआकाश का सूनापन मेरे तनहा मन मेंपायल छनकाती तुम आ जाओ जीवन मेंसाँसे देकर अपनी संगीत अमर कर दोजग ने छिना मुझसे, मुझे जो भी लगा प्यारासब जीता किये मुझसे, मैं हर दम ही हारातुम हार के दिल अपना, मेरी जीत अमर कर दो
होठों से छू लो तुम
ReplyDeleteमेरा गीत अमर कर दो
बन जाओ मीत मेरे
मेरी प्रीत अमर कर दो
ना उम्र की सीमा हो, ना जन्म का हो बंधन
जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन
नई रीत चलाकर तुम ये रीत अमर कर दो
आकाश का सूनापन मेरे तनहा मन में
पायल छनकाती तुम आ जाओ जीवन में
साँसे देकर अपनी संगीत अमर कर दो
जग ने छिना मुझसे, मुझे जो भी लगा प्यारा
सब जीता किये मुझसे, मैं हर दम ही हारा
तुम हार के दिल अपना, मेरी जीत अमर कर दो